परिचय: कौन हैं संत रामपाल जी महाराज?
Saint Rampal Ji Maharaj life history
Saint Rampal Ji महाराज (जन्म नाम: रामपाल सिंह जाटयाण) एक प्रमुख आध्यात्मिक नेता हैं, जिन्हें उनके अनुयायी पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब का अवतार या तत्वदर्शी संत मानते हैं। वे कबीर पंथ की परंपरा में विश्वास रखते हैं और कहते हैं कि सभी धर्मग्रंथों (वेद, गीता, कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब) में एक ही परमात्मा कबीर की बात है, लेकिन गलत व्याख्या से भ्रम फैला है।

उनकी शिक्षाएं शास्त्र-सम्मत भक्ति पर आधारित हैं – नामदान (सतनाम + सारनाम) केवल एक प्रमाणित तत्वदर्शी संत से लेकर ही मोक्ष संभव है। वे मूर्ति पूजा, यज्ञ, तीर्थ, व्रत, मंत्र जाप आदि को अशास्त्रीय बताते हैं और कहते हैं कि ये काल (ब्रह्म) की माया में फंसाते हैं।
2026 में उनकी आयु 74-75 वर्ष है (जन्म: 8 सितंबर 1951)। वे हरियाणा के सतलोक आश्रम के संस्थापक हैं, जहां लाखों अनुयायी आते हैं। उनके अनुयायी उन्हें जगतगुरु कहते हैं, जबकि मीडिया और कुछ लोग उन्हें विवादास्पद या सेल्फ-स्टाइल्ड गॉडमैन कहते हैं।
प्रारंभिक जीवन: एक साधारण किसान परिवार से इंजीनियर तक
Saint Rampal Ji Maharaj age 2026
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हुआ था, हरियाणा राज्य के सोनीपत जिले के गोहाना तहसील के धनाना गांव में। उस समय यह क्षेत्र पंजाब राज्य में था (हरियाणा 1966 में अलग हुआ)।
- पिता: भगत नंदराम (या नंदलाल) – एक साधारण किसान, जाट समुदाय से।
- माता: भगतमति इंद्रो देवी – धार्मिक और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाली महिला।
- परिवार की स्थिति: बहुत साधारण, खेतीबाड़ी पर निर्भर। गांव में बिजली-पानी की कमी थी, लेकिन धार्मिक संस्कार मजबूत थे।
बचपन से ही रामपाल जी धार्मिक स्वभाव के थे। वे हनुमान जी के कट्टर भक्त थे। रोजाना हनुमान चालीसा 7 बार पढ़ते थे, सलासर धाम (राजस्थान) जाते थे। साथ ही श्री कृष्ण, खाटू श्याम, विष्णु आदि की पूजा करते थे। लेकिन इनसे उन्हें आत्मिक शांति नहीं मिली। वे सोचते थे – “क्या यही भक्ति है? क्यों मन नहीं लगता?”
शिक्षा: उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया (नीलोखेड़ी, करनाल के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से)। पढ़ाई के दौरान भी धार्मिक ग्रंथ पढ़ते रहे।
नौकरी: 1980 के दशक में हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) बने। लगभग 18 वर्ष (1982-2000) नौकरी की। इस दौरान परिवार के साथ रोहतक में रहते थे। विवाहित हैं, चार संतानें हैं (दो बेटे, दो बेटियां)। लेकिन वे कहते हैं – “सभी जीव मेरे बच्चे हैं, क्योंकि कबीर परमेश्वर के संतान हैं।”
आध्यात्मिक जागरण: नाम दीक्षा और गुरु मिलन
1988 में जीवन का टर्निंग पॉइंट आया। रामपाल जी ने स्वामी रामदेवानंद जी महाराज (107 वर्षीय कबीर पंथी संत) से मुलाकात की। स्वामी जी ने बताया – “तुम्हारी पूजा शास्त्र-विरुद्ध है। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 कहता है – शास्त्र छोड़कर मनमानी करने वाला न सिद्धि पाता है, न सुख, न परम गति।”
17 फरवरी 1988 (फाल्गुन अमावस्या की रात) को नाम दीक्षा ली – सतनाम और सारनाम मंत्र मिले। उम्र थी 37 वर्ष।
इसके बाद उन्होंने गहन अध्ययन शुरू किया:
- श्रीमद्भगवद्गीता
- वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद)
- कुरान शरीफ
- बाइबिल
- गुरु ग्रंथ साहिब
- कबीर सागर, अनुराग सागर, साखी, कबीर बीजक आदि।
वे कहते हैं – 9 मार्च 1997 को परमेश्वर कबीर ने दर्शन दिए और आदेश दिया – “सच्चा ज्ञान फैलाओ।”
1993 में स्वामी जी ने सत्संग करने का आदेश दिया। 1994 में नामदान देने का। 2000 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा (पत्र संख्या 3492-3500, 16 मई 2000)।
शिक्षाएं: विस्तार से समझें (यहां सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा)
संत रामपाल जी की शिक्षाएं कबीर साहेब की वाणी पर आधारित हैं। मुख्य बिंदु:
- परमात्मा कौन है? – केवल कबीर (कविर्देव) परम ब्रह्म हैं। ब्रह्मा-विष्णु-शिव तीन गुणों के देवता हैं, जन्म-मृत्यु में फंसे। कबीर अजन्मा, अजर-अमर हैं।
- सच्ची भक्ति: तीन मंत्र – OM (ॐ) त्रिगुण माया का, तत् (ब्रह्म का), सत (परब्रह्म का)। लेकिन पूर्ण मोक्ष के लिए सतनाम + सारनाम (कबीर मंत्र) जरूरी, जो केवल तत्वदर्शी संत देते हैं।
- मोक्ष का मार्ग: अच्छे कर्म + नाम जाप + गुरु भक्ति। मूर्ति पूजा, तंत्र-मंत्र, यज्ञ आदि से नहीं।
- काल (ब्रह्म) की माया: ब्रह्म ने 21 ब्रह्मांड बनाए, लेकिन काल ने जीवों को फंसाया। सतलोक (अमर लोक) असली घर है।
- समाज सुधार: जातिवाद, नशा, मांसाहार, दहेज, अंधविश्वास खत्म करो। महिलाओं-पुरुषों में समानता।
- सभी ग्रंथों का सार: गीता अध्याय 15 श्लोक 1-4 में पुरुषोत्तम (कबीर) का वर्णन। कुरान में अल्लाह = कबीर। बाइबिल में कबीर।
उनकी मुख्य किताबें:
- ज्ञान गंगा: सभी ग्रंथों का सार। परमात्मा की पहचान, पूजा विधि, मोक्ष मार्ग। हजारों लोगों ने पढ़कर नाम लिया।
- जीने की राह: दैनिक जीवन में भक्ति कैसे करें।
- अंध श्रद्धा भक्ति खतरा ए जान: अंधभक्ति के खतरे।
- गहरी नजर गीता में: गीता का शुद्ध अनुवाद + व्याख्या।
- अन्य: हिंदी-इंग्लिश में कई पुस्तकें, मुफ्त वितरण।
सतलोक आश्रम: स्थापना और कार्य
saint rampal ji maharaj life history
1999 में पहला आश्रम करोंथा (रोहतक) में। मुख्य आश्रम:
- बरवाला (हिसार)
- धनाना
- खमाणों (पंजाब)
- अन्य राज्यों में कई।
आश्रमों में:
- मुफ्त सत्संग
- नामदान
- भोजन (सात्विक, शाकाहारी)
- शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर
- कोई दान नहीं मांगा जाता।
लाखों अनुयायी, खासकर हरियाणा, UP, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली।
विवाद और कानूनी संघर्ष: 2006 से 2026 तक
2006 में एक पुराने हत्या केस (1990s) में कोर्ट समन इग्नोर करने पर contempt। 40+ समन चूक गए।
2014 का मुख्य घटनाक्रम:
- हरियाणा पुलिस ने बरवाला आश्रम पर छापा मारा (नवंबर 2014)।
- समर्थकों ने विरोध किया, हिंसा हुई – 5-6 मौतें (महिलाएं, बच्चा)।
- आरोप: हत्या, राजद्रोह, साजिश, अवैध हथियार।
- समर्थक कहते हैं – पुलिस ने tear gas, गोली चलाई, महिलाओं-बच्चों को ढाल बनाया।
2018 में हिसार कोर्ट ने दो केसों में उम्रकैद।
2025-2026 अपडेट:
- अगस्त 2025 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दो मुख्य केसों (FIR 429, 430) में सजा सस्पेंड की। आधार: 74 वर्ष उम्र, 10+ साल जेल, मेडिकल सबूत कमजोर, पीड़ित परिवार विरोध नहीं।
- सितंबर 2025 में bail याचिका पर कुछ शर्तें (जनता उकसाना नहीं)।
- एक sedition केस में bail रिजेक्ट, लेकिन अपील लंबित।
- कुल 11 साल जेल (2014-2025)। अब ज्यादातर केसों में राहत, अपील पेंडिंग।
समर्थक इसे झूठे केस कहते हैं, विरोधी गंभीर आरोप।
वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026)
74 वर्ष की उम्र में, संत रामपाल जी महाराज सत्संग जारी रखते हैं। बोध दिवस (15-17 फरवरी) बड़े आयोजन। अनुयायी जय सतलोक कहते हैं।
निष्कर्ष: सत्य की खोज में एक जीवन
संत रामपाल जी महाराज का जीवन साधारण से असाधारण तक का सफर है – इंजीनियर से संत, जेल से न्याय की उम्मीद तक। उनके अनुयायी उन्हें मोक्षदाता मानते हैं। आलोचक विवाद देखते हैं। लेकिन उनकी शिक्षाएं लाखों को प्रभावित कर रही हैं – शास्त्र पढ़ो, सच्ची भक्ति करो, समाज सुधारो।
यदि आप जानना चाहें, उनकी किताबें पढ़ें या सत्संग सुनें – jagatgururampalji.org या SA News चैनल।
जय सतलोक! 🙏





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