By vsasingh.com | Updated: June 2026 | History, Heritage & Travel
बिहार के नालंदा जिले में स्थित नालंदा महाविहार (Nalanda Mahavihara) केवल एक खंडहर नहीं है, बल्कि यह विश्व की सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय की अमिट विरासत है । यह वह स्थान है जहाँ 5वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी तक 10,000 से अधिक विद्यार्थी और 2,000 से अधिक आचार्य ज्ञान की खोज में जुटे रहते थे ।

नालंदा पहला आवासीय विश्वविद्यालय था, जहाँ छात्रों के लिए छात्रावासों की व्यवस्था थी । यहाँ चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस और तुर्की से विद्वान आते थे, जो इसे पहला वैश्विक विश्वविद्यालय बनाता है । 1979 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त इस स्थल को 2016 में पुनः यूनेस्को सूची में स्थान मिला ।
इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में vsasingh.com आपको लेकर आया है:
- नालंदा का पौराणिक और ऐतिहासिक इतिहास – गुप्तकाल से लेकर विनाश तक की पूरी कहानी
- महाविहार की वास्तुकला और अद्भुत संरचना – 11 विहार, 14 मंदिर और 9 मंजिला पुस्तकालय
- सम्पूर्ण यात्रा गाइड 2026 – कैसे पहुँचें, क्या देखें, कब जाएँ
तो चलिए शुरू करते हैं इस ज्ञान यात्रा को, जहाँ हर ईंट अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए है।
1: Nalanda Mahavihara Location & Overview
स्थान और भौगोलिक जानकारी
नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर बिहार राज्य के नालंदा जिले में स्थित हैं, जो राजधानी पटना से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है ।
- जिला: नालंदा, बिहार
- निकटतम शहर: राजगीर (लगभग 12 किमी)
- क्षेत्रफल: 23 हेक्टेयर (खंडहर क्षेत्र)
- ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 200 मीटर
- निर्देशांक: 25°08′11″N 85°26′37″E
खंडहर परिसर
आज नालंदा महाविहार के खंडहर 23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं और इनमें 11 विहार (आवासीय-शैक्षणिक भवन) और 14 मंदिर (चैत्य) शामिल हैं । ये लाल ईंटों से निर्मित संरचनाएँ अपने समय की उत्कृष्ट वास्तुकला को दर्शाती हैं ।
आस-पास का वातावरण
खंडहर हरी-भरी पहाड़ियों और कृषि भूमि से घिरे हुए हैं। यहाँ पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित स्थलों की श्रृंखला है, जिसमें नालंदा पुरातत्व संग्रहालय भी शामिल है, जहाँ खुदाई में मिली कांस्य प्रतिमाएँ, सिक्के और मिट्टी के बर्तन प्रदर्शित हैं ।
2: नालंदा का पौराणिक और ऐतिहासिक इतिहास
बुद्धकाल में नालंदा (500 ईसा पूर्व)
नालंदा का इतिहास बुद्धकाल से भी जुड़ा है। बुद्ध ने कई बार नालंदा का दौरा किया था और यहाँ पावारिका के आम्रवन में ठहरते थे । यहाँ उन्होंने सारिपुत्त (बुद्ध के प्रमुख शिष्य) के साथ संवाद किए, जिन्होंने बुद्ध के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए “सिंहनाद” किया था । सारिपुत्त का जन्म और निर्वाण भी नालंदा में ही हुआ था ।
महावीर (जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर) का भी नालंदा से गहरा संबंध था। कई जैन ग्रंथों में नालंदा का उल्लेख मिलता है । सम्राट अशोक (250 ईसा पूर्व) ने सारिपुत्त की स्मृति में एक स्तूप का निर्माण करवाया था ।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना – गुप्तकाल (5वीं शताब्दी)
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम (शक्रादित्य) ने 5वीं शताब्दी (लगभग 427 ईस्वी) में की थी । चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) और प्रज्ञावर्मन ने उन्हें संस्थापक बताया है, और स्थल पर मिली एक मुहर भी इसकी पुष्टि करती है ।
सातवीं शताब्दी तक नालंदा ने अपने स्वर्णिम युग को प्राप्त कर लिया था ।
नालंदा का स्वर्णिम काल: 6ठी-9वीं शताब्दी
इतिहासकार सुकुमार दत्त के अनुसार, नालंदा का इतिहास दो मुख्य चरणों में विभाजित है:
| चरण | काल | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रथम चरण (विकास) | 6ठी–9वीं शताब्दी | गुप्तकाल की उदार सांस्कृतिक परंपराएँ, बौद्ध एवं हिंदू शिक्षा का समन्वय |
| द्वितीय चरण (पतन) | 9वीं–13वीं शताब्दी | बौद्ध धर्म में तांत्रिक विकास, पाल वंश के अंतर्गत उत्थान एवं अंततः पतन |
हर्षवर्धन (606-648 ईस्वी) ने नालंदा को विशेष संरक्षण दिया । उनके काल में मठ के पास 200 गाँव थे, जो कर-मुक्त अनुदान के रूप में थे ।
पाल वंश का युग (8वीं–12वीं शताब्दी)
पाल वंश के शासकों ने नालंदा को महत्वपूर्ण संरक्षण दिया । इस काल में पाँच महान महाविहार स्थापित हुए :
| महाविहार | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| नालंदा | बिहार | सबसे प्राचीन |
| विक्रमशिला | बिहार | प्रमुख तांत्रिक केंद्र |
| सोमपुर | बांग्लादेश | विशालतम बौद्ध विहार |
| उदंतपुर | बिहार | 8वीं शताब्दी में स्थापित |
| जग्गदल | बांग्लादेश | 11वीं शताब्दी में स्थापित |
3: नालंदा का विनाश और अंत (1193 ईस्वी)
बख्तियार खिलजी का आक्रमण
नालंदा विश्वविद्यालय का अंत 1193 ईस्वी में बख्तियार खिलजी के तुर्क आक्रमण से हुआ । फारसी इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज ने अपने इतिहास “तबकात-ए-नासिरी” में लिखा कि हजारों भिक्षुओं को जिंदा जलाया गया और हजारों का सिर कलम किया गया ।
तीन बार विनाश, दो बार पुनर्निर्माण
| क्रम | समय | आक्रमणकारी | परिणाम |
|---|---|---|---|
| पहला विनाश | 455-467 ईस्वी | हूण (मिहिरकुल) | पुनर्निर्माण (गुप्त वंश) |
| दूसरा विनाश | 7वीं शताब्दी | गौड़ | पुनर्निर्माण (हर्षवर्धन) |
| अंतिम विनाश | 1193 ईस्वी | बख्तियार खिलजी | पूर्ण विनाश, कभी पुनर्निर्माण नहीं |
पुस्तकालय की अग्नि
नालंदा के नौ मंजिला पुस्तकालय को आग लगा दी गई। कहा जाता है कि हजारों पांडुलिपियों की आग से निकला धुआँ कई दिनों तक आसमान में छाया रहा । कुछ विद्वानों का मानना है कि पुस्तकालय इतना विशाल था कि इसे जलने में तीन महीने लग गए ।
विनाश के बाद भी अस्तित्व
1235 ईस्वी में जब तिब्बती अनुवादक छाग लोत्सावा ने नालंदा का दौरा किया, तो उन्हें वहाँ 90 वर्षीय आचार्य राहुल श्रीभद्र मिले, जो लगभग 70 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे । यह बताता है कि विनाश के बाद भी कुछ समय तक शिक्षा की परंपरा जारी रही।
1400 ईस्वी तक नालंदा में बौद्ध अवशेष मौजूद थे, और छागलराज अंतिम राजा थे जिन्होंने नालंदा को संरक्षण दिया ।
4: नालंदा का पुनर्जागरण – पुनः स्थापना (2006 से वर्तमान)
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का सपना
28 मार्च 2006 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बिहार विधान मंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन का प्रस्ताव रखा । यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था ।
नालंदा विश्वविद्यालय विधेयक, 2010
- 21 अगस्त 2010: राज्यसभा में पारित
- 26 अगस्त 2010: लोकसभा में पारित
- 21 सितंबर 2010: राष्ट्रपति की स्वीकृति
- 25 नवंबर 2010: विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया
अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी
सिंगापुर, जापान, चीन, भारत और अन्य देशों ने इस परियोजना में भाग लिया :
| देश | योगदान |
|---|---|
| जापान | लगभग $100 मिलियन |
| सिंगापुर | वित्तीय और तकनीकी सहयोग |
| भारत (बिहार सरकार) | 443 एकड़ भूमि |
कुल अनुमानित लागत: $1 बिलियन (निर्माण में $500 मिलियन + बुनियादी ढाँचे में $500 मिलियन)
नया नालंदा विश्वविद्यालय
नया Nalanda Mahavihara राजगीर (बिहार) में स्थापित किया जा रहा है, जो प्राचीन नालंदा स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर है ।
- कुलपति (Chancellor): प्रो. अमर्त्य सेन
- प्रथम कुलसचिव (Vice-Chancellor): गोपा सभरवाल (2011 में नियुक्त)
- पहला शैक्षणिक सत्र: 2014 से
5: नालंदा की वास्तुकला – एक अद्भुत नमूना
वास्तुकला की विशेषताएँ
यूनेस्को के अनुसार, नालंदा की वास्तुकला ने पूरे एशिया की शैक्षणिक संरचनाओं को प्रभावित किया :
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अक्षीय योजना | दक्षिण से उत्तर की ओर संरेखण |
| ईंट निर्माण | लाल ईंटों की उत्कृष्ट चिनाई |
| विहार (आवासीय-शैक्षणिक) | 11 विहार, चतुर्भुजाकार, मध्य में प्रांगण |
| चैत्य (मंदिर) | 14 मंदिर, पंचमुखी (quincunxial) योजना |
| जल निकासी | उन्नत जल निकासी व्यवस्था |
11 विहार – छात्रावास एवं शिक्षा केंद्र
हर विहार चतुर्भुजाकार था, जिसके मध्य में प्रांगण (courtyard) था । यहाँ :
- छात्र कक्ष – प्रत्येक विहार में 50-100 कक्ष
- सभागार – जहाँ आचार्य व्याख्यान देते थे
- दीवारों में निचे – रात में पढ़ने के लिए दीपक रखने हेतु
14 मंदिर – पूजा एवं ध्यान केंद्र
मंदिर संख्या 3 (The Great Stupa) सबसे प्रभावशाली है :
- पाँच-स्तरीय संरचना
- सीढ़ियाँ जो ऊपर तक जाती हैं
- आसपास छोटे स्तूप
- यहाँ से पूरे खंडहर का दृश्य दिखता है
पुस्तकालय – “धर्मगंज” (Mountain of Truth)
नालंदा का पुस्तकालय विश्व का सबसे बड़ा ज्ञान भंडार था :
| पुस्तकालय भवन | अर्थ | मंजिलें |
|---|---|---|
| रत्नसागर | रत्नों का सागर | 3 मंजिल |
| रत्नोदधि | रत्नों का महासागर | 3 मंजिल |
| रत्नरंजक | रत्नों से आनंदित | 3 मंजिल |
तीनों भवन मिलकर 9 मंजिला पुस्तकालय बनाते थे । यहाँ लाखों पांडुलिपियाँ थीं, जिनमें बौद्ध, हिंदू, जैन ग्रंथ सम्मिलित थे ।
अंतर्राष्ट्रीय वास्तुकला प्रतियोगिता
नए Nalanda Mahavihara के निर्माण के लिए वास्तुशिल्प प्रतियोगिता आयोजित की गई :
| विजेता | विशेषता |
|---|---|
| वास्तुशिल्प कंसल्टेंट्स (Vastu Shilpa Consultants) | मुख्य डिजाइन |
| dbHMS | ट्रिपल नेट-जीरो (ऊर्जा, जल, अपशिष्ट) योजना |
6: नालंदा का शैक्षणिक महत्व – 64 विषयों का विश्वविद्यालय
64 विषय – अध्ययन का क्षेत्र
Nalanda Mahavihara का पाठ्यक्रम 64 विषयों में फैला था, जो ह्वेनसांग और इत्सिंग के यात्रा विवरणों में दर्ज है ।
| विषय श्रेणी | उदाहरण |
|---|---|
| धर्म | बौद्ध (महायान, हीनयान), हिंदू दर्शन |
| दर्शन | माध्यमिक, योगाचार, तर्कशास्त्र |
| भाषा एवं व्याकरण | संस्कृत, पाली, व्याकरणशास्त्र |
| चिकित्सा | आयुर्वेद, शल्यचिकित्सा |
| गणित एवं खगोल | अंकगणित, ज्योतिष, बीजगणित |
| राजनीति एवं अर्थशास्त्र | अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र |
| ललित कला | मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत |
प्रवेश परीक्षा – योग्यता का मापदंड
नालंदा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय था :
- कठोर परीक्षा पास करने के बाद ही प्रवेश मिलता था
- इस परीक्षा को “द्वार-परीक्षा” (Entrance Examination) कहा जाता था
- इसके बाद ही छात्र दीक्षा ले सकता था
शिक्षा प्रणाली – गुरु-शिष्य परंपरा
यूनेस्को के अनुसार :
- शिक्षण पद्धति: बहस (debate) और संवाद पर केंद्रित
- नालंदा को “मध्यकालीन तर्कशास्त्र एवं संवाद विद्यालय” कहा जाता था
- गुरु-शिष्य परंपरा – व्यक्तिगत मार्गदर्शन
- स्नातक “आचार्य” या “पंडित” की उपाधि प्राप्त करते थे
7: Nalanda Mahavihara के प्रमुख आचार्य एवं विद्वान
| आचार्य | काल | विशेषता |
|---|---|---|
| नागार्जुन | 2-3 शताब्दी ई | माध्यमिक दर्शन के जनक |
| असंग | 4-5 शताब्दी ई | योगाचार के जनक |
| वसुबंधु | 4-5 शताब्दी ई | अभिधर्मकोश के लेखक |
| ह्वेनसांग (Xuanzang) | 7वीं शताब्दी (चीन) | 15 वर्ष नालंदा में, विस्तृत विवरण छोड़ा |
| इत्सिंग (Yijing) | 7वीं शताब्दी (चीन) | 671 ईस्वी में यात्रा, बौद्ध ग्रंथ अनुवाद |
| शाक्यश्रीभद्र | 13वीं शताब्दी | अंतिम प्रमुख आचार्य, 1204 ई में तिब्बत |
8: सम्पूर्ण यात्रा गाइड 2026
कैसे पहुँचें? (How to Reach)
सड़क मार्ग (By Road)
- पटना से: लगभग 88-90 किमी, 2.5-3 घंटे
- राजगीर से: लगभग 12 किमी, 30 मिनट
- गया से: लगभग 80 किमी
- निकटतम बस स्टैंड: नालंदा टाउन, यहाँ से ऑटो-रिक्शा
- सड़क मार्ग: पटना-राजगीर रोड
रेल मार्ग (By Train)
- निकटतम स्टेशन: राजगीर (RGD) – 12 किमी
- अन्य: बिहार शरीफ (15 किमी), गया (80 किमी), पटना (90 किमी)
- ट्रेन: पटना, दिल्ली, कोलकाता से ट्रेनें
हवाई मार्ग (By Air)
- निकटतम हवाई अड्डा: पटना (पीएटी) – 90 किमी
- यहाँ से टैक्सी या बस द्वारा नालंदा
खंडहर देखने का समय (Timings)
| गतिविधि | समय |
|---|---|
| खुले रहने का समय | सूर्योदय से सूर्यास्त तक (सामान्यतः 9:00 AM – 5:00 PM) |
| संग्रहालय समय | 10:00 AM – 5:00 PM (सोमवार को बंद) |
| बंद दिवस | शुक्रवार (ASI नियम) |
प्रवेश शुल्क (Entry Fee)
| श्रेणी | शुल्क (₹) |
|---|---|
| भारतीय | ₹25-50 |
| विदेशी | ₹300-500 |
| संग्रहालय | अलग से शुल्क |
कब जाएँ? (Best Time to Visit)
| समय | सलाह |
|---|---|
| सितंबर से अप्रैल | सर्वोत्तम मौसम – ठंडा और सुहावना |
| मई-जून | बहुत गर्मी – भयंकर गर्मी, टालें |
| जुलाई-अगस्त | मानसून – बारिश, पर भीड़ कम |
यात्रा के लिए आवश्यक सुझाव
- गाइड बुक करें: स्थानीय गाइड खंडहरों की कहानी को जीवंत कर देते हैं
- आरामदायक जूते – बहुत पैदल चलना होगा
- पानी और टोपी – धूप से बचाव
- इलेक्ट्रॉनिक्स: ASI से अनुमति आवश्यक
- खंडहरों पर चढ़ें नहीं – यह पुरातात्विक स्थल है, सुरक्षा नियमों का पालन करें
9: नालंदा घूमने योग्य स्थान
| स्थान | विशेषता |
|---|---|
| विहार 1-11 | 11 आवासीय-शैक्षणिक भवन, दालान, कक्ष |
| मंदिर 3 (महास्तूप) | पाँच-स्तरीय संरचना, पूरे परिसर का दृश्य |
| प्राचीन रसोई | विशाल ओवन – 10,000 लोगों के भोजन का प्रमाण |
| नालंदा संग्रहालय | कांस्य मूर्तियाँ, सिक्के, “नालंदा की मुहर” |
| ह्वेनसांग स्मारक हॉल | चीनी शैली में, शांतिपूर्ण स्थान |
| नव नालंदा महाविहार | 1951 में स्थापित, आधुनिक बौद्ध अध्ययन केंद्र |
नालंदा विश्वविद्यालय का स्वर्ण युग
7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच नालंदा अपने चरम पर था।
इस दौरान:
- हजारों विद्यार्थी
- विश्वभर के विद्वान
- विशाल पुस्तकालय
- उन्नत शोध
नालंदा को विश्व का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय बनाते थे।
नालंदा विश्वविद्यालय का विनाश
भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक नालंदा का विनाश है।
बख्तियार खिलजी का आक्रमण
1193 ईस्वी में तुर्क सेनापति बख्तियार खिलजी ने नालंदा पर हमला किया।
विश्वविद्यालय को भारी क्षति पहुंचाई गई।
पुस्तकालय को आग
सबसे बड़ा नुकसान पुस्तकालय को हुआ।
लाखों पांडुलिपियों को जला दिया गया।
इतिहासकारों के अनुसार पुस्तकालय में लगी आग कई महीनों तक जलती रही।
नालंदा का पतन
आक्रमण के बाद विश्वविद्यालय धीरे-धीरे समाप्त हो गया।
सदियों तक इसके अवशेष मिट्टी में दबे रहे।
पुरातात्विक खोज
19वीं शताब्दी में नालंदा के अवशेषों की खोज शुरू हुई।
अलेक्जेंडर कनिंघम
ब्रिटिश पुरातत्वविदों ने नालंदा के खंडहरों का अध्ययन किया।
उत्खनन
खुदाई में:
- मठ
- मंदिर
- मूर्तियां
- पांडुलिपियों के अवशेष
प्राप्त हुए।
यूनेस्को विश्व धरोहर
2016 में नालंदा महाविहार को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
यह भारत की शिक्षा परंपरा के वैश्विक महत्व को दर्शाता है।
आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय
21वीं सदी में नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया।
पुनः स्थापना
2010 में नए नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
कई एशियाई देशों ने इसके पुनर्निर्माण में सहयोग दिया।
नालंदा की वैश्विक विरासत
नालंदा ने विश्व को सिखाया कि शिक्षा सीमाओं से परे होती है।
यह ज्ञान, संवाद और अनुसंधान का केंद्र था।
नालंदा से मिलने वाली सीख
नालंदा हमें सिखाता है:
- शिक्षा सबसे बड़ी शक्ति है।
- ज्ञान का कोई धर्म या सीमा नहीं होती।
- शोध और नवाचार समाज को आगे बढ़ाते हैं।
- संस्कृति और शिक्षा का संरक्षण आवश्यक है।
Nalanda Mahavihara के रोचक तथ्य
- विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय।
- लगभग 10,000 विद्यार्थी अध्ययन करते थे।
- लगभग 2,000 शिक्षक कार्यरत थे।
- विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय था।
- यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
- ह्वेनसांग और इत्सिंग यहां पढ़ चुके हैं।
10: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. Nalanda Mahavihara किसने बनवाया?
गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम (शक्रादित्य) ने 5वीं शताब्दी (लगभग 427 ईस्वी) में इसकी स्थापना की ।
2. नालंदा विश्वविद्यालय का विनाश किसने किया?
1193 ईस्वी में बख्तियार खिलजी ने इस तुर्क आक्रमणकारी ने नालंदा को नष्ट कर दिया ।
3. नालंदा में कितने विषय पढ़ाए जाते थे?
यहाँ 64 विषय पढ़ाए जाते थे, जिनमें धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, खगोल, व्याकरण, राजनीति और कला शामिल थे ।
4. नालंदा के पुस्तकालय का क्या नाम था?
तीन पुस्तकालय थे – रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक ।
5. नालंदा किस वर्ष UNESCO विश्व धरोहर स्थल बना?
2016 में ।
6. Nalanda Mahavihara में कितने छात्र और शिक्षक थे?
हेयडे में 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक ।
7. नालंदा में कौन-कौन से देशों के विद्वान आते थे?
कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस, तुर्की, ग्रीस ।
निष्कर्ष
नालंदा भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का प्रतीक है। यहाँ शिक्षा धर्म, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा और कला – हर क्षेत्र में थी। यह अंधविश्वास का नहीं, बल्कि तर्क, बहस और आलोचनात्मक चिंतन का विश्वविद्यालय था।
दुनिया का सबसे पहला आवासीय विश्वविद्यालय होने के कारण यह “Nalanda Mahavihara आदर्श” बना, जिसने पूरे एशिया की शिक्षा प्रणाली को प्रभावित किया ।
आज जब हम नालंदा के खंडहरों में खड़े होकर सोचते हैं कि





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