Kedarnath Temple: इतिहास, महत्व, यात्रा और संपूर्ण जानकारी

By vsasingh.com | Updated: June 2026 | Travel, Spirituality & Pilgrimage

हिमालय की गोद में, समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर (11,755 फीट) की ऊँचाई पर, जहाँ मंदाकिनी नदी अपनी धारा बहाती है, वहाँ स्थित है भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र धाम – केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Temple) । यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय आस्था, पौराणिक कथाओं और अध्यात्म का अद्भुत संगम है।

Kedarnath Temple
Kedarnath Temple

Kedarnath Temple 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उत्तराखंड के चार धाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) में दूसरे स्थान पर आता है । यह पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, कल्पेश्वर) में भी प्रमुख स्थान रखता है, जहाँ भगवान शिव के शरीर के अलग-अलग अंगों की पूजा होती है – केदारनाथ में कूबड़ (हंप) की ।

हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा को पूरा करने के लिए आते हैं। 2024 में इस यात्रा में 1.6 मिलियन से अधिक यात्रियों ने भाग लिया । Kedarnath Temple की यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि, साहस की परीक्षा और प्रकृति के साथ एकाकार होने का अनुभव है ।

इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में vsasingh.com आपको लेकर आया है:

  • केदारनाथ का पौराणिक और ऐतिहासिक इतिहास – महाभारत काल से लेकर आदि शंकराचार्य तक
  • मंदिर की वास्तुकला और दिव्य स्वरूप – पत्थरों से बनी अद्भुत संरचना, त्रिकोणीय शिवलिंग
  • धार्मिक महत्व और अनुष्ठान – 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, पंच केदार
  • सम्पूर्ण यात्रा गाइड 2026 – कैसे पहुँचें, कब जाएँ, क्या करें, नियम क्या हैं

तो चलिए शुरू करते हैं इस दिव्य यात्रा को, जहाँ हर कदम शिव की ओर है और हर साँस आस्था से भरी है।


1: Kedarnath Temple Location & Overview

स्थान और भौगोलिक जानकारी

Kedarnath Temple उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।

यह मंदिर मंदाकिनी नदी के तट पर हिमालय पर्वतमाला के बीच बना हुआ है।

मंदिर के आसपास बर्फ से ढके विशाल पर्वत इसकी सुंदरता को और भी अद्भुत बना देते हैं।

केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में, गढ़वाल हिमालय की श्रेणियों में स्थित है ।

विवरणजानकारी
राज्यउत्तराखंड
जिलारुद्रप्रयाग
निकटतम शहरगौरीकुंड (लगभग 16-18 किमी ट्रैक)
ऊँचाई3,583 मीटर (11,755 फीट)
नदीमंदाकिनी (गंगा की सहायक नदी)
निर्देशांक30°44′6.7″N 79°4′0.9″E

आस-पास का वातावरण

मंदिर हिमालय की बर्फीली चोटियों और हिमनदों से घिरा हुआ है। चोराबाड़ी हिमनद (Chorabari Glacier) मंदाकिनी नदी का स्रोत है, जो मंदिर के समीप से बहती है । यह स्थान अत्यंत रमणीय और शांतिपूर्ण है, जहाँ प्रकृति अपने मूल रूप में विद्यमान है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही नंदी (भगवान शिव के वाहन) की विशाल पत्थर की मूर्ति दिखाई देती है, जो सीधे मुख्य गर्भगृह के सामने स्थित है । मंदिर के चारों ओर बर्फ से ढकी चोटियाँ, हिमनद और घाटियाँ इसे एक अलौकिक अनुभव देती हैं ।

Kedarnath नाम का अर्थ

“केदार” शब्द का अर्थ होता है खेत या भूमि का स्वामी।

भगवान शिव केदारनाथ रूप में संपूर्ण सृष्टि के रक्षक और पालनकर्ता माने जाते हैं।

“नाथ” का अर्थ है स्वामी।

इस प्रकार केदारनाथ का अर्थ हुआ:

“संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान शिव


2: Kedarnath Temple History

नाम की उत्पत्ति (Etymology)

“केदारनाथ” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है:

  • केदार (Kedara) – “दलदली भूमि” या “पानी से मिश्रित मिट्टी”
  • नाथ (Natha) – “स्वामी” या “भगवान”

यह नाम उस भौगोलिक विशेषता को दर्शाता है जहाँ बर्फ पिघलने और बारिश से घाटी दलदली हो जाती है । “केदारनाथ” का अर्थ है “दलदली भूमि के स्वामी”

निर्माण और प्राचीनता

यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है कि मूल Kedarnath Temple किसने और कब बनवाया था । हालाँकि, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने महाभारत युद्ध के बाद किया था ।

आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) को इस मंदिर को पुनर्जीवित करने और इसे पूरे भारत में शैव तीर्थस्थलों के नेटवर्क में शामिल करने का श्रेय दिया जाता है । माना जाता है कि उन्होंने इस मंदिर के साथ-साथ बद्रीनाथ और उत्तराखंड के अन्य मंदिरों को पुनर्जीवित किया ।

सबसे पुराना लिखित संदर्भ: केदारनाथ का सबसे पहला उल्लेख स्कंद पुराण (लगभग 7वीं-8वीं शताब्दी) में मिलता है, जहाँ गंगा नदी की उत्पत्ति से जुड़ी एक कथा में केदार (केदारनाथ) का नाम आता है । 12वीं शताब्दी तक केदारनाथ एक प्रमुख तीर्थस्थल बन चुका था, जिसका उल्लेख गहड़वाल मंत्री भट्ट लक्ष्मीधर द्वारा लिखित “कृत्य-कल्पतरु” में मिलता है ।


3: पौराणिक कथाएँ (Mythological Legends)

केदारनाथ से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जो इस स्थान की पवित्रता और महत्व को दर्शाती हैं।


कथा 1: पांडव और शिव का बैल रूप (The Pandava Legend)

महाभारत के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडवों को अपने संबंधियों के वध के पाप से मुक्त होने के लिए भगवान शिव के दर्शन करने थे ।

जब पांडव शिव को खोजते हुए हिमालय पहुँचे, तो शिव ने उन्हें क्षमा नहीं करना चाहा और बैल (नंदी) का रूप धारण कर लिया । वे गुप्तकाशी (“छिपी हुई काशी”) चले गए, जहाँ शिव ने छिपने का प्रयास किया ।

भीम (दूसरे पांडव) ने बैल को पहचान लिया और उसकी पूँछ और पिछले पैर पकड़ लिए । शिव बैल रूप में जमीन के अंदर समा गए, लेकिन उनका कूबड़ (हंप) जमीन के ऊपर रह गया । शिव ने अंततः पांडवों को क्षमा कर दिया और उन्हें उस कूबड़ की पूजा करने का निर्देश दिया – जो आज केदारनाथ के नाम से जाना जाता है ।

पंच केदार: शिव के शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए:

  • केदारनाथ – कूबड़ (हंप)
  • तुंगनाथ – भुजाएँ (Arm)
  • रुद्रनाथ – चेहरा (Face)
  • मध्यमहेश्वर – नाभि (Navel)
  • कल्पेश्वर – बाल (Hair)

कथा 2: नर-नारायण की तपस्या

शिव पुराण के अनुसार, नर और नारायण (भगवान विष्णु के दो अवतार) ने हिमालय में तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, शिव उनके सामने प्रकट हुए और उनके अनुरोध पर केदारनाथ में ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए ।

कथा 3: आदि शंकराचार्य का समाधि स्थल

आदि शंकराचार्य – अद्वैत वेदांत के महान दार्शनिक – का केदारनाथ से गहरा संबंध है। मान्यता है कि उन्होंने 8वीं शताब्दी में केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित कई उत्तराखंड मंदिरों को पुनर्जीवित किया ।

परंपरा के अनुसार, आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ के पास समाधि ली (महासमाधि) और यहीं पर उनका देहांत हुआ । मंदिर के पीछे आदि शंकराचार्य की समाधि मंदिर स्थित है ।

रोचक तथ्य: अखंड ज्योति (अनंत लौ) मंदिर परिसर में सदियों से जल रही है, जो भगवान शिव की शाश्वत उपस्थिति का प्रतीक है ।


4: मंदिर की वास्तुकला (Architecture)

निर्माण शैली

केदारनाथ मंदिर उत्तर भारतीय हिमालयी वास्तुकला (Nagara Style) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है ।

विशेषताविवरण
शैलीनागरा (Nagara) – शंक्वाकार शिखर
निर्माण सामग्रीग्रे पत्थर (स्लैब), इंटरलॉकिंग डिज़ाइन (बिना मोर्टार के)
सुरक्षालोहे के क्लैंप (Iron Clamps)
अभिमुखताउत्तर-दक्षिण (अधिकांश हिंदू मंदिर पूर्व या पश्चिम की ओर होते हैं)
संरचनागर्भगृह (Sanctum Sanctorum) + मंडप (Hall)
ऊँचाईआधार से शिखर तक लगभग 23 मीटर

मुख्य संरचना

गर्भगृह (Garbhagriha): मंदिर का सबसे भीतरी भाग, जहाँ त्रिकोणीय शिवलिंग स्थित है। इसे “सदाशिव” रूप में पूजा जाता है ।

शिवलिंग की विशेषता:

  • त्रिकोणीय आकार – पारंपरिक अंडाकार लिंग से भिन्न
  • ऊँचाई: लगभग 3.6 मीटर (12 फीट)
  • परिधि: लगभग 3.6 मीटर (12 फीट)
  • स्वयंभू (Svayambhu) – प्राकृतिक रूप से निर्मित, मानव-निर्मित नहीं

मंडप (Mandapa): स्तंभों वाला एक छोटा हॉल, जहाँ श्रद्धालु पूजा के लिए एकत्रित होते हैं। यहाँ पांडवों, द्रौपदी, कृष्ण, नंदी और वीरभद्र (शिव के रक्षकों में से एक) की मूर्तियाँ स्थापित हैं ।

एक अद्भुत विशेषता: पत्थर पर उकेरा सिर

मंदिर के त्रिकोणीय पत्थर पर एक मानव सिर उकेरा गया है । ऐसा ही एक सिर उसी स्थान के पास एक अन्य मंदिर में भी देखा जा सकता है, जहाँ शिव और पार्वती का विवाह हुआ था ।

पंच केदार की कथा

शिव के शरीर के विभिन्न अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए जिन्हें पंच केदार कहा जाता है।

केदारनाथ – कूबड़
तुंगनाथ – भुजाएं
रुद्रनाथ – मुख
मध्यमहेश्वर – नाभि
कल्पेश्वर – जटा

इन पांचों मंदिरों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।

आदि शंकराचार्य और केदारनाथ

माना जाता है कि वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने कराया था।

उन्होंने पूरे भारत में सनातन धर्म के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केदारनाथ के पीछे उनकी समाधि भी स्थित है।


5: धार्मिक महत्व (Religious Significance)

12 ज्योतिर्लिंगों में स्थान

केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव के सबसे पवित्र निवास स्थानों में गिने जाते हैं । यह सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊँचा है ।

चार धाम (Char Dham)

केदारनाथ उत्तराखंड के चार धाम (छोटा चार धाम) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है:

  1. यमुनोत्री – माँ यमुना का स्रोत
  2. गंगोत्री – माँ गंगा का स्रोत
  3. केदारनाथ – भगवान शिव (पश्चिमी द्वार)
  4. बद्रीनाथ – भगवान विष्णु (पूर्वी द्वार)

पंच केदार (Panch Kedar)

Kedarnath Temple पंच केदार का पहला स्थान है, जहाँ शिव के शरीर के अलग-अलग अंगों की पूजा होती है ।

स्कंद पुराण का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, Kedarnath Temple में गंगा का जल शिव की जटाओं से बहता है, और इस जल को पीने से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति (मोक्ष) मिलती है ।

तेवरम में उल्लेख

केदारनाथ मंदिर का उल्लेख तेवरम (भक्ति साहित्य) में भी मिलता है, जहाँ तिरुग्ञानसम्बंधर, अप्पर, सुंदरर और सेक्किज़र ने इसकी स्तुति की है ।


6: अनुष्ठान और परंपराएँ (Rituals & Traditions)

पुजारी परंपरा – दक्षिण भारतीय संबंध

Kedarnath Temple की पुजारी परंपरा अत्यंत अनोखी है।

पुजारी वर्गविवरण
मुख्य पुजारी (रावल)वीरशैव जंगम समुदाय (कर्नाटक)
पूजा कर्तारावल स्वयं पूजा नहीं करते, उनके सहायक उनके निर्देशन में पूजा करते हैं
भाषापूजा के मंत्र कन्नड़ भाषा में उच्चारित होते हैं
कार्यकाल5 मुख्य पुजारी, प्रत्येक 1 वर्ष के लिए रावल पद संभालते हैं (घूर्णन प्रणाली)

वर्तमान रावल (2024-25): श्री वागीश लिंगाचार्य (दावणगेरे, कर्नाटक) ।

रोचक तथ्य: रावल शीतकाल में देवता के साथ उखीमठ चले जाते हैं ।

शीतकालीन प्रवास (Winter Migration)

चूँकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ पहुँचना असंभव हो जाता है, इसलिए:

मौसमस्थानक्रिया
गर्मी (अप्रैल-नवंबर)केदारनाथदर्शन के लिए खुला
सर्दी (नवंबर-अप्रैल)उखीमठ (रुद्रप्रयाग, ~1,300 मीटर)देवता को स्थानांतरित किया जाता है, पूजा जारी रहती है

दैनिक पूजा

  • अभिषेक: शिवलिंग का प्रतिदिन दूध, गंगाजल, बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है
  • आरती: प्रतिदिन शाम को आरती की जाती है
  • विशेष: शिवलिंग को घी से मालिश किया जाता है – यह परंपरा भीम द्वारा शिव के शरीर की मालिश करने की स्मृति में है

7: 2013 की बाढ़ – एक चमत्कार (The 2013 Floods)

16-17 जून 2013 को उत्तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया । लेकिन केदारनाथ मंदिर को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ – यह एक चमत्कार माना गया ।

मंदिर कैसे बचा?

भीम शिला (Bhim Shila): एक विशाल बोल्डर ने प्राकृतिक बाधा का काम किया और मंदिर को बाढ़ के पानी से बचाया । यह बोल्डर मंदिर के पीछे इस प्रकार फंस गया कि पानी दोनों ओर से बह गया और मंदिर सुरक्षित रहा ।

क्षति और बहाली

  • मंदिर परिसर, आसपास की दुकानें, होटल और सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गईं
  • सैकड़ों तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की मृत्यु
  • भारतीय सेना ने मंदिर के अंदर शरण लिए लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला
  • बाद में बुनियादी ढाँचे और ट्रैक मार्गों का पुनर्निर्माण किया गया

मान्यता: स्थानीय लोग इसे भगवान शिव की कृपा मानते हैं कि मंदिर सुरक्षित रहा ।


8: 2026 की यात्रा – संपूर्ण गाइड (Complete Travel Guide 2026)

केदारनाथ कब खुलेगा? (Opening Date 2026)

केदारनाथ मंदिर 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे फिर से खुला, जो इस वर्ष के चार धाम यात्रा सीजन की शुरुआत है ।

  • तिथि: 22 अप्रैल 2026
  • समय: प्रातः 8:00 बजे
  • अवसर: अक्षय तृतीया
  • स्थिति: 6 महीने की सर्दियों की बंदी के बाद पुनः खुला

अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration)

सभी तीर्थयात्रियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है :

पंजीकरण प्रक्रिया:

  1. आधिकारिक पोर्टल: registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाएँ
  2. मोबाइल OTP से साइन अप करें
  3. निजी विवरण भरें (नाम, आयु, आधार)
  4. केदारनाथ और यात्रा की तिथियाँ चुनें
  5. फोटो और पहचान पत्र अपलोड करें
  6. QR-आधारित e-Pass डाउनलोड करें

पास को सोनप्रयाग जैसे प्रमुख स्थानों पर जाँच के लिए रखना होगा । ऑफलाइन पंजीकरण हरिद्वार, ऋषिकेश और सोनप्रयाग में भी उपलब्ध है ।


9: केदारनाथ कैसे पहुँचें? (How to Reach)

मार्ग: दिल्ली से केदारनाथ

चरणमार्गदूरी/समय
दिल्ली → हरिद्वारसड़क मार्ग (NH 44)~220 किमी, 5-6 घंटे
हरिद्वार → गौरीकुंडसड़क मार्ग (ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी से होकर)~240 किमी, 9-10 घंटे
गौरीकुंड → केदारनाथट्रैक (16-18 किमी) या हेलीकॉप्टर6-10 घंटे (पैदल)

वैकल्पिक:

  • ट्रेन: दिल्ली से हरिद्वार/ऋषिकेश तक
  • हवाई जहाज़: दिल्ली से देहरादून तक, फिर सड़क मार्ग से

अंतिम पड़ाव: गौरीकुंड से केदारनाथ

गौरीकुंड से केदारनाथ तक की 16-18 किमी की यात्रा कई तरीकों से की जा सकती है :

माध्यमसमयविशेषता
पैदल ट्रैक6-10 घंटेसबसे आम, मध्यम कठिनाई
पोनी/घोड़ा4-6 घंटेकिराए पर उपलब्ध
पालकी (Doli)4-6 घंटेबुजुर्गों/बीमारों के लिए
हेलीकॉप्टर10-15 मिनटफाटा, सिरसी, गुप्तकाशी से

ट्रैक के प्रमुख पड़ाव: जंगल चट्टी, भीमबली


10: मौसम और यात्रा की सलाह (Weather & Travel Tips)

केदारनाथ का मौसम (Weather)

मौसमतापमानविशेषता
अप्रैल-जून0°C से 15°C (दिन), 0°C से नीचे (रात)सबसे अच्छा समय, पर रात में बहुत ठंड
जुलाई-सितंबर5°C से 15°Cमानसून, भूस्खलन का खतरा – टालें
अक्टूबर-नवंबर-5°C से 10°Cशरद ऋतु, मंदिर बंद होने से पहले का समय

सावधानी: अप्रैल में भी बर्फबारी संभव है, इसलिए गर्म कपड़े और ट्रैकिंग जूते लाएँ ।

यात्रा लागत (Cost Estimate)

मदअनुमानित लागत (₹)
मूल यात्रा (परिवहन + आवास)₹10,000 – ₹20,000 प्रति व्यक्ति
हेलीकॉप्टरअतिरिक्त – फाटा/गुप्तकाशी से उड़ान
आवासगुप्तकाशी/सोनप्रयाग में पहले से बुक करें (सीमित)

यात्रा के लिए आवश्यक सुझाव

  1. पंजीकरण अनिवार्य: यात्रा से पहले ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करें
  2. पहचान पत्र: e-Pass और ID साथ रखें
  3. स्वास्थ्य: बुजुर्गों और बीमारों के लिए डॉक्टर से सलाह लें
  4. हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पिएँ, थकावट से बचें
  5. अकेले न ट्रैक करें: रात में अकेले ट्रैक करने से बचें
  6. ग्रीन यात्रा: प्लास्टिक का उपयोग न करें, “ग्रीन यात्रा” का समर्थन करें
  7. नियम: मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और फिल्मांकन प्रतिबंधित है

11: केदारनाथ के आसपास घूमने योग्य स्थान (Nearby Attractions)

स्थानदूरीविशेषता
गुप्तकाशी~50 किमीशिव का छिपने का स्थान, “छिपी हुई काशी”
उखीमठ~50 किमीशीतकालीन देवता निवास
त्रियुगीनारायण मंदिरसोनप्रयाग से 7 किमीशिव-पार

Kedarnath मंदिर में पूजा

मंदिर में विभिन्न प्रकार की पूजा और आरती होती हैं।

  • महाभिषेक पूजा
  • रुद्राभिषेक
  • लघु रुद्राभिषेक
  • शिव सहस्रनाम पाठ

Kedarnath यात्रा के लिए आवश्यक सुझाव

  • गर्म कपड़े साथ रखें।
  • आरामदायक जूते पहनें।
  • मौसम की जानकारी लेते रहें।
  • स्वास्थ्य जांच करवाकर जाएं।
  • पर्याप्त पानी पीते रहें।
  • यात्रा पंजीकरण अवश्य कराएं।

केदारनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

  • बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल।
  • समुद्र तल से 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित।
  • 2013 की आपदा में मंदिर सुरक्षित रहा।
  • आदि शंकराचार्य से जुड़ा हुआ है।
  • चार धाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • पंच केदार में सबसे प्रमुख मंदिर है।

Kedarnath और सनातन संस्कृति

Kedarnath मंदिर भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सनातन संस्कृति का प्रतीक है।

यह मंदिर हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धा और विश्वास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।


निष्कर्ष

केदारनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। हिमालय की गोद में स्थित यह पवित्र धाम हजारों वर्षों से भगवान शिव की महिमा का प्रतीक बना हुआ है।

इसके इतिहास, पौराणिक कथाओं, दिव्य वातावरण और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य ने इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में शामिल कर दिया है। यदि आप जीवन में एक बार भी आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव करना चाहते हैं, तो केदारनाथ धाम अवश्य जाएं।

vsasingh.com की ओर से भगवान केदारनाथ के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।

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