Baba Nagarjun जिनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्रा था, हिंदी और मैथिली भाषा के एक प्रख्यात कवि, लेखक और चिंतक थे। उन्हें “जनकवि” भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने हमेशा आम जनता के दुःख-दर्द, संघर्ष और आकांक्षाओं को अपनी कविता और गद्य में स्वर दिया। नागार्जुन भारतीय साहित्य के ऐसे स्तंभ हैं जिन्होंने साहित्य को जनता की आवाज़ बना दिया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Baba Nagarjun का जन्म 30 जून 1911 को बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गांव में हुआ था। बचपन में ही उनकी माता का निधन हो गया था। आरंभिक शिक्षा उन्होंने गांव में ही प्राप्त की। इसके बाद वे संस्कृत पढ़ने के लिए कलकत्ता और बनारस गए।
नागार्जुन ने पालि, संस्कृत और बौद्ध दर्शन का गहन अध्ययन किया और कुछ समय तक श्रीलंका में भी रहकर बौद्ध धर्म की शिक्षा ली। वहीं उन्होंने बौद्ध भिक्षु बनकर “नागार्जुन” नाम धारण किया।
साहित्यिक योगदान
✍ कविता की भाषा: आम जनता की भाषा

नागार्जुन की कविता की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरल, स्पष्ट और जन-समर्थक भाषा है। वे भाषायी आडंबर से दूर रहते थे और कविता को “जनसंघर्ष की आवाज़” मानते थे।
प्रमुख काव्य संग्रह:
- युगधारा
- सतरंगे पंखों वाली
- प्यासी पथराई आंखें
- तुमने कहा था
✍ गद्य साहित्य: सामाजिक यथार्थ की परछाईं
नागार्जुन ने उपन्यास और कहानी विधा में भी बड़ी सफलता पाई। उनके उपन्यासों में ग्रामीण जीवन, राजनीतिक भ्रष्टाचार, किसान-मजदूरों की हालत और सामाजिक असमानता का यथार्थ चित्रण मिलता है।
प्रमुख उपन्यास:
- वरुण के बेटे
- बलचनमा
- रतिनाथ की चाची
- कुंभीपाक
राजनीतिक विचार और संघर्ष
बाबा नागार्जुन सिर्फ साहित्यकार नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी चिंतक और समाजवादी विचारक भी थे। वे जेपी आंदोलन से लेकर आपातकाल के विरोध तक सक्रिय रहे और कई बार जेल गए।
उनकी कविता “मंत्री जी” और “भोजपुरी में लिखी गई ता देसवा के हालत” जैसी रचनाएं सीधे सत्ता को चुनौती देती हैं।
मैथिली भाषा का योगदान
नागार्जुन ने मैथिली में भी रचनाएं कीं और मैथिली साहित्य को जनसरोकारों से जोड़ा। उन्होंने मैथिली को आम जीवन की बोलियों और भावनाओं के साथ प्रस्तुत किया।
Baba Nagarjun की खास विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 30 जून 1911, सतलखा, दरभंगा, बिहार |
| असली नाम | वैद्यनाथ मिश्रा |
| प्रमुख भाषाएं | हिंदी, मैथिली, संस्कृत, पालि |
| उपाधि | जनकवि |
| प्रमुख विधाएं | कविता, उपन्यास, निबंध, यात्रा-वृत्तांत |
| मृत्यु | 5 नवंबर 1998 |
प्रमुख रचनाओं से उद्धरण
“इस प्यारे भारत देश को, शोषण मुक्त बनाएंगे
हर मजलूम के हक़ को, हम लड़कर दिलवाएंगे!“
“लाशों की सड़ांध से जो, उठता है धुआं
कविता उसी की नाक में उंगली डालती है!“
बाबा नागार्जुन और आज का भारत
नागार्जुन की कविता आज भी प्रासंगिक है। सामाजिक विषमता, राजनीतिक भ्रष्टाचार और आम जनता की पीड़ा को वह आज भी स्वर देती है। उनकी रचनाएं युवाओं में जागरूकता पैदा करती हैं और साहित्य को जनसरोकार से जोड़ती हैं।
निष्कर्ष
बाबा नागार्जुन न केवल एक कवि थे, बल्कि एक आंदोलनकारी आत्मा थे। उनकी लेखनी में विद्रोह है, करुणा है, संघर्ष है और सबसे बढ़कर जनता का आत्मबल है। ऐसे जनकवि को हमारा शत-शत नमन।
- Kitchen Garden Kaise Lagaye: Terrace Gardening Ideas for Beginners in India (Step-by-Step Complete Guide)
- Credit Card Bill Late Fee Se Kaise Bachein – Smart Tips (2026 Guide)
- Scholarship Kaise Payein: Maharashtra aur Bihar ke Students ke liye (Complete Guide)
- Sarkari Naukri Ki Taiyari – SSC, UPSC, aur Railway Ke Tips
- Best Small Cap Mutual Funds – Long Term Investment Ke Liye (2026 Guide)





Leave a Reply